संतों का सम्मान – सनातन की पहचान
संत परिचय पत्र का उद्देश्य भारत की संत परंपरा, गुरु परंपरा, अखाड़ा संस्कृति और सनातन धर्म की आध्यात्मिक विरासत को एक डिजिटल मंच पर संरक्षित करना है।
हमारा उद्देश्य सनातन संत परंपरा की गरिमा को सुरक्षित रखते हुए प्रत्येक संत को एक विश्वसनीय डिजिटल पहचान देना है, जिससे समाज, प्रशासन और श्रद्धालु सरलता से संत की प्रामाणिकता जान सकें।
देश के प्रत्येक संत तक सत्यापित परिचय पत्र की सुविधा पहुँचाना।
एक ऐसा संत समाज जहाँ पहचान, सम्मान और सेवा तीनों सुरक्षित हों।
धर्म, सेवा, साधना एवं संस्कार — यही हमारे कार्य का आधार हैं।
संत ऑनलाइन फॉर्म द्वारा अपना विवरण एवं दस्तावेज़ प्रस्तुत करते हैं।
अखाड़ा, गुरु परंपरा एवं दस्तावेज़ों की जाँच की जाती है।
स्वीकृति उपरांत QR युक्त परिचय पत्र एवं प्रमाण पत्र जारी होते हैं।
संत समाज की गरिमा की रक्षा हम सबका कर्तव्य है। संत परिचय पत्र इसी संकल्प का सशक्त माध्यम है।
संत समाज की पहचान एवं सम्मान की रक्षा हेतु संगठन की स्थापना।
ऑनलाइन पंजीकरण एवं QR सत्यापन प्रणाली का शुभारंभ।
चिकित्सा शिविर, भंडारा, गौ-सेवा एवं वृद्ध संत सहायता कार्यक्रम।
देश के 24 राज्यों में सदस्यता एवं आश्रम पंजीकरण की सुविधा।
वृद्ध एवं असहाय संतों हेतु निःशुल्क जाँच व औषधि।
पर्व एवं आयोजनों पर नियमित अन्नक्षेत्र संचालन।
गौशालाओं को चारा एवं चिकित्सा सहयोग।
बालकों हेतु संस्कार एवं वेद अध्ययन कक्षाएँ।
एडमिन पैनल के Team सेक्शन से सदस्य जोड़ें।