हमारे बारे में

संतों का सम्मान – सनातन की पहचान

संत आरती
परिचय

एक संत – एक परिचय – एक पहचान

संत परिचय पत्र का उद्देश्य भारत की संत परंपरा, गुरु परंपरा, अखाड़ा संस्कृति और सनातन धर्म की आध्यात्मिक विरासत को एक डिजिटल मंच पर संरक्षित करना है।

हमारा उद्देश्य सनातन संत परंपरा की गरिमा को सुरक्षित रखते हुए प्रत्येक संत को एक विश्वसनीय डिजिटल पहचान देना है, जिससे समाज, प्रशासन और श्रद्धालु सरलता से संत की प्रामाणिकता जान सकें।

हमारा लक्ष्य

देश के प्रत्येक संत तक सत्यापित परिचय पत्र की सुविधा पहुँचाना।

हमारी दृष्टि

एक ऐसा संत समाज जहाँ पहचान, सम्मान और सेवा तीनों सुरक्षित हों।

हमारे मूल्य

धर्म, सेवा, साधना एवं संस्कार — यही हमारे कार्य का आधार हैं।

कार्यप्रणाली

हम कैसे कार्य करते हैं

1
पंजीकरण

संत ऑनलाइन फॉर्म द्वारा अपना विवरण एवं दस्तावेज़ प्रस्तुत करते हैं।

2
सत्यापन

अखाड़ा, गुरु परंपरा एवं दस्तावेज़ों की जाँच की जाती है।

3
स्वीकृति

स्वीकृति उपरांत QR युक्त परिचय पत्र एवं प्रमाण पत्र जारी होते हैं।

अध्यक्षीय संदेश

अध्यक्ष महोदय

संत समाज की गरिमा की रक्षा हम सबका कर्तव्य है। संत परिचय पत्र इसी संकल्प का सशक्त माध्यम है।

12,500+
पंजीकृत संत
640+
आश्रम एवं मठ
280+
आयोजित कार्यक्रम
24
राज्यों में उपस्थिति
हमारी यात्रा

संकल्प से सिद्धि तक

स्थापना

संत समाज की पहचान एवं सम्मान की रक्षा हेतु संगठन की स्थापना।

डिजिटल पहल

ऑनलाइन पंजीकरण एवं QR सत्यापन प्रणाली का शुभारंभ।

सेवा विस्तार

चिकित्सा शिविर, भंडारा, गौ-सेवा एवं वृद्ध संत सहायता कार्यक्रम।

राष्ट्रीय स्वरूप

देश के 24 राज्यों में सदस्यता एवं आश्रम पंजीकरण की सुविधा।

सत्संग
सेवा कार्य

समाज के लिए हमारे प्रयास

चिकित्सा शिविर

वृद्ध एवं असहाय संतों हेतु निःशुल्क जाँच व औषधि।

भंडारा सेवा

पर्व एवं आयोजनों पर नियमित अन्नक्षेत्र संचालन।

गौ सेवा

गौशालाओं को चारा एवं चिकित्सा सहयोग।

वेद-संस्कार शिक्षा

बालकों हेतु संस्कार एवं वेद अध्ययन कक्षाएँ।

मार्गदर्शक मंडल

हमारा नेतृत्व

एडमिन पैनल के Team सेक्शन से सदस्य जोड़ें।